Wednesday, 19 June 2013

देव भूमि पर भी ऱाजनीति



                                           उतराखंड यानी के देवभूमि पर नदियों के उफान से जो प्रचडं आपदा आई है उन सबसे तो आप परीचित है लेकिन कुछ ऐसी बाते है जिसमे लोग कह रहे है कि ये सब उपर वाले की कृपा से हो रहा है मैं बता दूँ, हो तो उपर वाले की कृपा से ही रहा है लेकिन ऊपर मतलब God नही, बल्कि वो ऊपर वालों कि नाकामियों की वजह से हो रहा है जो कुर्सी पर बैठे कह रहे है, हो रहा भारत निमार्ण और वो जो कह रहे है कि मैं भारत को अमेरिका बनाना चाहता, और ये भी पीछे नही है जो कह रहे है कि हमारा साथ छोड़ जाओगे, तो गद्दी कहाँ से पाओगे, जी हाँ आप बिलकुल ठीक समझ रहें है.,....................
                                                इन ऊपर वालों की नाकामियों की वज़ह से ही बेड़ा पार लगा है जो आपदा प्रबंधक कि बाते करने के अलावा Helicopter पर सैर करके जा रहे है, और तो ओर उतराखंड के मुख्यमंत्री साहब ( विजय बहुगुणा) ने तो पिड़ित लोगों की मदद करने के नाम पर वो कर दिखाया जिसकी कमी थी, जो वहाँ फंसे लोग मदद कि गुहार लगा रहे तो ये मुख्यमंत्री साहब दिल्ली मे प्रेस कांफ्रेस कर रहे थे, अरे भाई प्रेस कांफ्रेस तो बाद मे भी हो सकती है पहले उन लोगों कि तो मदद करों, जिनकी बदोलत आप उस पद पर हो| अब मदद करना तो दूर जिन लोगो के घर बाढ़ मे बह गए या टूट गए उन्हे ये 2500 rs. मुआवज़ा दे रहे, जिनके घरो की किमत है लाखों मे, और कह रहे शांति बनाए रखिए, अरे भाई मुआवज़े कि बात तो बाद मे भी हो जाती कम से कम 4 दिन से भूखे लोगों को खाने का तो इंतज़ाम करा देते हाँ खाने का उंतज़ाम हो या न हो पर अगर कोई बिल्डर वहाँ Hotel बनाने कि सिफारिश लेकर आता तो उसके लिए तो खाली ज़मीन पर Tourist Place hotel दोनो रातों रात तैयार हो जाते ,...........

                                        जो भी मेरे इस विचार को पढ़ रहा है और समझ रहा है वे अपने विचारों को भी यहाम जोड़ कर लिख सकता है और साथ ही आप उन लोगों कि सुरक्षा कि दुआं करें और सब जल्द ठिक हो जाए इसकी कामना करें,...............

Tuesday, 4 June 2013

आओ “पेड़ लगाएं”


बात बड़ी ही अज़ीब है लेकिन सच है , और इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब मैं दोपहर के समय दिल्ली की सड़को पर घूमने निकला सिर्फ ये जानने के लिए कि बाहर इतनी गर्मी मे वे लोग कैसे रहते है जिनके सर पर न छत है और न ही खाने को कुछ बड़िया साधन, पहनने को वही पूराने घिसे पिटे गले कपड़े  और बदन पर लगती गर्म हवा, बातों बातों मे जब मैने एक अधेड़ उर्म के व्यक्ति से पूछा|  जब आप मेरी उर्म के रहे होंगे क्या तब भी दिल्ली मे इतनी गर्मी पड़ती थी जितनी के अबतो उसके बेजान शरीर से बड़ी थकी हुई आवाज़ निकली ओर कहा कि गर्मी पहले भी पड़ती थी लेकिन उस समय सड़को पर इतना धुआं धाड़नही होता था और बदन पर ठंडी हवा पहुंचाने का काम सड़क के किनारे लगे हरे भरे पेड़ पौधे करते थे लेकिन अब न तो पेड़ पौधे बचे हैं ओर धुआं धाड़ इतना कि सांस लेना भी दुष्वार हो जाता है इस गर्मी में|
                          इनकी बातों को सुनकर मुझे यही ज्ञात हुआ की सरकार के द्दारा चलाए जा रहे Clean Delhi Green Delhi के अभियान इनके लिए तो एक सपने जैसा है लेकिन कुछ ही पल मे मैने सोचा ओर उस अधेड़ उर्म के व्यक्ति से कहा कि ये जो सरकार का अभियान है उसे हम अपना अभियान मानकर पेड़ पौधे लगाए तो शायद इस अभियान की चाल, रफतार मे तबदील हो जाए|  बहुत सोच विचार के उसने कहा हाँमैं अपने आस पास की जगहों पर पेड़ पौधे भी लगाऊंगा ओर उनकी देख भाल भी करुगां| लेकिन दोस्तो ये बात सिर्फ गर्मी को दूर भगाने की नही, बल्कि अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ बनाने की है ओर लोगों को जागरुक करने कि भी है
                                                            मैं यहां अपने इस ब्लॉग के माध्यम से आपके सामने अपने विचारों को व्यक्त कर रहा हूँ और आपसे गुज़ारिश कर रहा हूँ कि अपने किमती समय मे से थोड़ा समय निकालकर इस ओर भी ध्यान दें अपने लिए नही बल्कि अपने वातावरण के लिए ओर उन तमाम लोगों के लिए जो इन पर निर्भर है एक भी पौधा लगाने के बाद जो आपको खुशी मिलेगी वो मैं अच्छे से समझूंगा, क्यों कि वह खुशी मैने खुद मेहसूस कि है और अगर मेरे बताने से पहले ही ये कार्य कर चूके हैं तो आप भी अपने तज़रबे ओर विचारों को यहां comment  कर सकते है|
    धन्यवाद: