Saturday, 24 December 2011

आखिर कब समझेगें हम

हम क्यों नही समझते, क्यों हम धरती माँ को बर्बाद करने पर तुले हैं क्यों हम आज भी उन चीज़ो का उपयोग करते है जिससे पूरी मानव जाती को खतरा है और साथ ही धरती माँ को भी|
           आज हम पश्चिमी देशों की होड़ मे उनसे आगे तो निकल रहे है किन्तु मानव जाति का सर्वनाश धीरे-धीरे कर रहे है भारत देश, जिसको एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है, सब तबाह हो रहा है मौसम मे परिवर्तन के कारण खेतों मे उपजाऊ ठीक ठंग से नही हो पा रही है और न ही उन्हे साफ पानी सही मात्रा मे मिल रहा है  क्यों भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जहां नदियों को पूजा जाता है और उन्हे माता का सम्मान दिया जाता है लेकिन हम ही लोग क्या करते हैं एक प्लास्टिक बैग मे पूजा का समान भरकर उसे गंगा या जमुना मे फेंक देते है हम से इतना गंदा कर देते हैं की उसी पानी कि सफाई होने के बाद जब हमारे घरों मे वहां का पानी आता है तो वह इतना गंदा होता है कि पीना तो दूर हम उसे नहाने भी योग्य नही समझते, और कह देते हे आसानी से की हमारी तो सरकार भी ऐसी है जो हमे साफ पानी तक नही प्रदान करती, खेर कुछ कमी अगर सरकार मे हे तो हम भी कम नही है इसके जिम्मेदार सरकार हैं तो हम भी पीछे नही है इसका सबसे बड़ा कारण तो बम लोग ही है जो वहां पूजा के समन से भरा प्लास्टिक बैग फैंकते हैं ये तो बात रही नदियों मे प्लास्टिक बैग फैंक कर उसे गंदा करने कि|
                                      सरकार ने कुछ समय पहले भारतीय बाज़ारो में धड़ल्ले से हो रहे इस्तेमाल प्लास्टिक बैग पर 10,000 का जुर्माना भी रखा था परन्तु दुकानदारों ने कुछ समय तक तो आज्ञा का पालन बखुभी निभाया, लेकिन वक्त के पश्चात फिर प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल उसी जोरों मे होने लगा जैसा जुर्माना लगने से पहले था,
            एक तरफ जहां प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल गंदे तरीके से हुआ, तो दुसरी ओर नदियां भी गंदी होती रही और अभी भी है,
                                     वर्तमान युग मे हम जहां भारत को एक यूरोपीय देश बनाने मे तुले है वही हम बड़ी-बड़ी इमारतों और यतायात वाहनों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके इस पूरी दुनिया से हम सभी पेड़ पौधों को जो नुकसान पहुचाया हैं उसका खामियाज़ा भी एक न एक दिन हमे ही उठाना पड़ेगा, आज जगह जगह जिन पेड़ों को काट कर वहां मॉल व बड़ी-बड़ी इमारते जो बनाइ जा रही है उससे जो प्रदूषण फैल रहा है उसके जिम्मेदार वो लोग है जो पैसों के लालच मे इतने अंधे हो गए है कि उन्हे अपने पैसों के फायदों के अलावा कुछ नज़र ही नही आ रहा|
                                   इस धरती को बर्बाद होने से बचाने का एक मात्र यही तरीका है कि हम सबको जागरुक होकर इसके खिलाफ़ होना पड़ेगा,और अपनी बात सब तक पहुचानी पड़ेगी जैसा में कर रहा हूँ आप लोग इसे पड़ कर मुझे अपनी राय ज़रुर लिखिए... और इस धरती को काली नज़र वाले काले प्रदूषण से बचाने के लिए हमें जितने हो सके उतने पेड़ व पौधे ज़रुर लगाऐं, इसलिए पेड़ लगाओ जिन्दगी बचाओ.............................
                                

Friday, 23 December 2011

5 से 11 जनवरी, प्रगति मैदान मे मचेगी ‘धूम’

   राजधानी दिल्ली मे प्रगति मैदान मे 5 जनवरी से जो ऑटो एक्सपो शुरु होने जा रहा है इससे बड़ी खुशखबरी फास्ट बाईक व कार राईडिंग वालो के लिए क्या हो सकती है और पिछली बार की तरह इस बार की थीम भी मोबिलिटी फॉर ऑल रखी गई है| इस बार 24 देशों कि कंपनियां अपनी कारों का प्रर्दशन दिखाने आ रही है और 1500 है हिस्सा लेना वालों की तादात, 50 लॉन्च होंगी, जिनमें कारें, टू विल्हर, बसें और ट्रक शामिल हैं और इस बार ऑटो एक्स्पो के लिए 1,15,000 वर्गमीटर जगह दी गई है|
                                           जहां एक तरफ मार्केट मे गिरावट आने के चलते बहुत सी कंपनियों मे स्लो डाऊन चल रहा है वहीं दूसरी तरफ इंडिया की ऑटो मोबाईल इंडस्ट्री अच्छा परफॉर्म कर रही है और इसलिए दुनिया भर की नज़र इंडिया की ऑटो मोबाईल कंपनी पर टिकी है क्यों की सबको इंडियन मार्केट मे बहुत संभावनाएं दिख रही है| ऑटो एक्स्पो की स्टियरिंग कमिटी के चेयरमैन राजीव कौल ने एक इंटरव्यू मे बताया है कि ऑटो एक्स्पो मे सिर्फ कारें और बाइक्स ही नही देखने को मिलेगी बल्कि कंपनियां ऑटो पाटर्स, ऐक्ससरीज और म्यूज़िक सिस्टम के लिए अलग-अलग सेगमेंट रखेंगी|, कई कंपनियां फ्यूचर कार भी पेश करेंगी, जिनमे बैटरी से चलने वाली कारों के अलावा हाईब्रिड टेक्नॉलजी वाली कारो को भी पेश किया जाएगा|
                            इस बार इस तरह के कुछ नए प्रर्दशन 2012 के ऑटो एक्स्पो मे देखने को मिलेंगे, जो लोगों के दिल को जितने मे सक्षम होंगे, वैसे तो दिल्ली मे लोगों व यूथ को लूभाने के लिए कुछ न कुछ अलग तरह के प्रोग्राम समय समय पर होते रहते है, जो लोगों को बेहद पंसद आते है और लोग भी उनकी चर्चा करे बिना नही थकते, लेकिन ये एक ऐसा ऐगज़िबिशन हे जो 2साल मे एक बार दिल्ली के प्रगति मैदान मे जनवरी के शुरुआती दिनो मे लगाया जाता है जिसको देखने हर साल भारी भीड़ यहां उमड़ कर आती है और इसी बात को ध्यान मे रख कर यहां के आर्गनाईज़र्स ने इस बार तय किया हे कि एक दिन मे सिर्फ एक लाख लोगों से ज्यादा एंट्री बंद कर दी जाएगी, वैसे तो आम लोगों के लिए एंट्री सिर्फ 10 ओर 11 को ही है लेकिन फिर भी जो भीड़ दो दिन मे आएगी उसी को ध्यान मे रख कर ये फैसला लिया गया है| अब देखते हें की कितने लोग ऑटो एक्सपो का लुत्फ ले पाते है और कितने इसकी आलोचना करते हैं
                                                                                  इस बार ऑटो एक्सपो मे पेट्रोल के बढ़ते दामो को ध्यान मे रख कर कुछ ऐसी फ्यूचर कारें भी निकाली हैं जो बैटरी से चलेंगी और बेहद कम रेंज मे भी होगी, इस ऑटो एक्सपो मे मंहगी कारो के साथ साथ कम रेंज की कारो को दिखाया जाएगा, लोगों की जेबो पर ज्यादा जोर नही पड़ेगा|

Tuesday, 20 December 2011

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग

कश्मीर, अगर हम बात करें कश्मीर की तों इसे भारत का अभिन्न अंग तो माना जाता ही है साथ ही इसे धरती पर ज़न्नत भी कहा जाता है इसकी प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही बनती है जो इसे  बर्बाद भी कर रही है कारण न तो यह पूरी तरह भारत का अंग है न ही पाकिस्तान का और न ही ये स्वतंत्र है
कश्मीर समस्या का जो सबसे बड़ा कारण है वो हे कुछ लोगों का इस्लाम के बारे मे गलत प्रचार करना, ओर कश्मीर मे रह रहे हिन्दु लोगो को धर्म परिवर्तन करने के लिए उन पर ज़ोर डालना ओर न मानने पर उन पर तथा उनके परिवार के लोगो पर अत्याचार करना, ये खतरा आज से नही बल्कि तब से है जब से कलिंग युद्द जितने के बाद अशोक ने बौद्द धर्म का प्रचार करना शुरू किया था और कश्मीर भी गए थे उस समय वहां भारी तादाद मे हिन्दु रहते थे जिन्होने बौद्द धर्म अपनाया था और उसके बाद आज़ादी के बाद जब दोनो देशों के बीच कश्मीर समस्या उभर कर आई तो कश्मीर मे रह   रहे हिन्दुओं पर तभी से अत्याचार होने लगा, किसी के घर जलाए जा रहे थे तो किसी कि माँ बहल को उठा लिया जाता था, इसी तरह से उन निर्दोष लोगों पर कई अत्याचार होते रहे, यह समस्या विश्व स्तर पर पूरी दुनिया के सामने उभर कर आई जिसे सुलझाना आज़ तक हर किसी के लिए चुनौतिपूर्ण रहा?
                                                                                          एक और कश्मीर समस्या का कारण कांग्रेसी नेता पंडित ज़वाहर लाल नेहरु को भी माना जाता है जो आज़ादी के समय में भारत के प्रधानमंत्री थे, और उनके द्दारा ही कश्मीर मुद्दे की रिर्पोट को U.N.O मे रखा गया था, जिससे यह मसला विश्व स्तर पर उभर कर के दुनिया के सामने आया/ एक समय की बात है जब राजा हरि सिंह कश्मीर की बाग डोर संभाल रहे थे और भारत के गर्वनर ज़नरल के पद के लिए भी उन्होने मांउटबेटन को एक पत्र लिखकर उस पर हस्ताक्षर किए, तो यह बात कश्मीर मे बैठे शेख़ अब्दुल्ला और पंडित ज़वाहर लाल नेहरु को रास नही आई, क्यों कि इन दोनो की आपस मे साठ-गांठ बनी थी और दोनो की मित्रता इतनी घनिष्ठ थी कि ज़वाहर लाल नेहरु ने शेख़ अब्दुल्ला को कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त किया/
                       शेख़ अब्दुल्ला के प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद आपको उसके तीन चेहरे देखने को मिलते, घाटी मे मुस्लिम साम्प्रदायिकता वादी का, जम्मू मे क्रांतिकारी सुधारक का और शेष भारत मे प्रखर राष्ट्रवादी व सेकुलरिस्ट का, इस तरह पंडित जवाहर लाल नेहरु उसको और उसके अंतर्मन को उसके साथ रहकर भी पहचान न सके, और सरदार पटेल ने उनको ओर उनके अंतर्मन को दूर रहकर भी पहचान लिया, लगता है कि ज़वाहर लाल नेहरु जी उनकी मित्रता मे अन्धे हो गए थे, 
                                                                                          जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ज़म्मू कशमीर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में वहां के प्रधान मंत्री श़ेख अब्दुल्ला के बन्दीगृह मे प्रणान्त हो गया तो आकस्मिक निधन के समाचार से पूरे देश मे शोक की लहर फैल गई थी, कलकत्ता मे उनकी विराट शव यात्रा मे पूरा बंगाल ही क्या मानो पूरा देश उमड़ पड़ा था/ डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बिना प्रवेश पत्र लिए जम्मू-कश्मीर राज्य मे पूर्ण स्वास्थय शरीर के साथ प्रवेश किया था, उन्हे शेख अब्दुल्ला के हुकुम पर तुरन्त गिरफ्तार कर श्रीनगर भेजकर एक मकान मे नज़रबन्द कर दिया गया, उस नज़रबन्दी काल मे उनकी बीमारी की कोई सूचना किसी को नही दी गई थी, केवल उनकी मृत्यु की ही सूचना ही दी गई, तब उस समय करोड़ो उंगलीयां शेख़ अब्दुल्ला की ओर उठी, और बंगाल के एक कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधान चन्द्र रॉय ने शेख अब्दुल्ला को तार देकर पूछा था, कि डॉक्टर मुखर्जी के पारिवारीक चिकित्सक होने के नाते उनकी अवस्था की सूचना उन्हे क्यों नही दी गई/
                                              उस समय मुखर्जी प्रथम लोकसभा के गठन के कुछ महीनो बाद ही सितम्बर 1962 मे कश्मीर गए थे/ और जम्मू की एक विशाल जनसभा मे उन्होने घोषणा की थी मैं आपको भारतीय संविधान के अंतर्गत लाऊंगा, अन्यथा इसके लिए में अपना बलिदान दे दूंगा/
                                                                                                                 उन्होने अपना वचन निभाया, उन्होने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रजा परिषद के एक देश मे दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नही चलेंगे नही चलेंगे, फिर श्यामा प्रसाद जी की मृत्यु को समूचे देश ने उनके आत्मबलिदान के रुप मे देखा था, इस त्रासदी के डेढ़ महीने के भीतर ही पंडित जवाहर लाल नेहरु के आदेश पर उनके अन्यय मित्र श़ेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के समाचार सुनकर देश को साहसा विश्वास नही हुआ, क्या सचमुच ऐसा हो सकता है/ यदि उस समय मुखर्जी का आत्मबलिदान नही हुआ होता, तो क्या शेख अब्दुल्ला की  गिरफ्तारी संभव होती, यदि उस समय श़ेख को कश्मीर के प्रधानमंत्री के पद से दर्खास्त करके गिरफ्तार नही किया गया होतो तो क्या कश्मीर भारत का अंग रह जाता? इनसे भी बड़ा प्रशन यह है कि जब जवाहर लाल नेहरु ने डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु की जांच कि देश व्यापी मांग को ठुकरा दिया था, तो उन्होने अचानक शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार क्यों किया, पदच्युक्त क्यों किया? क्या वे भी मन ही मन श़ेख अब्दुल्ला को डॉक्टर मुखर्जी का हत्यारा समझते थे? क्या नेहरु जी डॉक्टर मुखर्जी से सहमत थे कि शेख अब्दुल्ला कश्मीर को भारत से पृथ्यकथा के मार्ग पर ले जा रहे थे
                                                     इन्ही सभी बातों को ध्यान मे रख कर ये कहा जाता है कि अगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान उस समय न होता तो कश्मीर, क्या भारत का अंग होता और श़ेख अब्दुल्ला से कश्मीर को भारत के अंतर्गत लाया जाता और पंडित जवाहर लाल नेहरु के सम्बन्ध श़ेख अब्दुल्ला के साथ जो थे उससे तो फिर भारत को भी खतरा होता, अगर उनका बलिदान न होता तो,
                        इतिहास बड़ा ही निर्मम होता है वह किसी लिहाज़ नही करता, यह किसी को क्षमा नही करता, यदी आज के कांग्रेसी इन निर्दोष हिन्दुओं की हत्या कि जिम्मेदारी किसी के माथें मढ़ना नही चाहते है तो वे अपने माथें को टटोलें, क्यों कि कश्मीर समस्या उन्होने ही खड़ी कि है ओर अब उसे इस खूनी मुकाम तक पहुँचाया है|                                                                                                                                   

Sunday, 11 December 2011

नही चलेंगे राहुल के पेंतरें

11 दिसम्बर 2011 को अन्ना हजारे की टीम ने जो एक दिन के अनशन से पी. चिदम्बरम और राहुल गांधी पर जो सीधा निशाना साधा है इससे उनके छक्के तो छुटे ही है  साथ ही जनता के सामने हमारी भ्रष्ट सरकार का पर्दा भी  फाश कर दिया है, जी हाँ जंतर मंतर पर ह्ए इस अनशन से जनता के सामने एक और बात आई है जो यह है की जन लोक पाल की जो कमेटी सदस्य है उसके अन्तराल होने वाला कार्य सब राहुल गांधी की निगरानी मे होता है जो इस देश से भ्रष्ट लोगो को निकालने के लिए अथवा यहां से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए बिल्कुल नही हो पाएगा, क्यों की जो खुद भ्रष्ट है और उसी की निगरानी मे अगर सारा काम चलेगा तो कहां तक जायज़ है

                                                                   आज जंतर मंतर मे हुए अन्शन के दौरान अन्ना हज़ारे ने कहा की जब मेरी बात प्रधान मंत्री मनमोहन से हुई तो उन्होने कहां कि मैं एक रिर्पोट बिल पास की कमेटी के पास यहां से भेज दूंगा, लेकिन जब अन्ना हजारे कमेटी के पास पहुचे तो उन्होने कहां की हमे p.m की कोई रिर्पोट नही मिली ऐसा कह कर उन्हे चुप करा दिया, और अन्ना हज़ारे ने जब रिर्पोट के लिए C.B.I  जांच परताल की तो C.B.I की टीम ने भी अपनी पीट दिखा दी, अन्ना ने जब फिर P.M से बात की तो पता चला की रिर्पोट तो भेजी गई थी, फिर ्अन्ना जी ने कहां कि ये हरकत उस व्यक्ति कि हो सकती है जिसके हाथ मे P.M  से भी ज्यादा पावर होगी, और वो एक ही व्यक्ति है राहुल गांधी जिसके कहने पर ये सब हो रहा है
                                                                             राहुल गांधी के दो चहरे भी देखे जा सकते है एक गांव- गांव जाकर दलितों पर अपना प्यार जताते हैं और दुसरा देश मे हो रहे भ्रष्टाचार को और बढ़ावा दे रहें हैं अन्ना जी ने यह भी बताया कि राहुल गांधी P.M बनना चाहते हैं अन्ना ने कहा कि P.M बनने के लिए पहले ऐसे काम तो करो कोई जो देश के हित मे हो, अन्ना ने कहा इन लोगों ने लोकपाल बिल को एक बनिए कि दुकान समझ रखी है........लगता है कि अन्ना जी अन्शन पर अन्शन रखते जाएंगे लेकिन ये बहरी और अन्धी सरकार कुछ नही करेगी, ये सरकार जो आज चुप बैठी है वो अपनी चुप्पी से जनता ओर बाकी सबको यही बता रही है कि चाहे तुम अन्शन रखो या कुछ और करो हम नही सुधरने वाले..... लेकिन हम भी यही कहेंगे अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं..............

            


Friday, 9 December 2011

आग का भीषण रुप कोलकाता में

कोलकाता मे स्थित बहुमंजिले ईमारत एक पर्यावेट अस्पताल(AMRI) में आग लगने से 89 लोगो की मौत हो गई, और 150 से ज्यादा घायल, आग अस्पताल के बेसमेंट से ही झुलसनी शुरु हो गई थी, और देखते ही देखते आग ने भीषण रुप धारण कर लिया,यह आग इतनी भयानक थी के इस पर  काबू पाना भी मुशकिल था, यह अस्पताल भारत के बेहतरीन सुपरस्पेशलिस्ट अस्पतालों मे से एक हैं, जहां विदेशी भी ईलाज़ कराने आते हैं इतने बडे और अच्छे अस्पताल मे आग लगने का कारण वही के कुछ मिलीभगत लोगों का हो सकता है, क्यों की जब ईतना बडा अस्पताल हे वहां तो सिक्योरिटी भी होगी और जब इतनी सिक्योरिटी के बाद भी आग पर काबू नही पाया गया तभी इस आग ने एक भीषण रुप धारण किया जिसके जिम्मेदार वहां कि Association को ही माना जा सकता हैं,
                    ऊपर से आग लगने पर जब अग्नि शमन पर काबू पाने वालों को बुलाया गया तो वह भी अपनी नकाबिलीयत को दिखा गए, लेट तो आए  ही थे साथ ही बचाव कार्य के बिना ही आए,इन्ही सब बातों और इन्ही हरकतों से पता चलता हे की देश मे इतने भ्रष्ट लोग भरे हें जो लोगों की जान की परवाह किए बिना ही चन्द रुपयों की खातिर ज़रा भी नही कतराते, एसे भ्रष्ट लोगों को कड़ी से कड़ी सज़ा सुनानी चाहिेए, अगर इसी तरह के हादसे देश मे इन भ्रष्ट लोगों की वज़ह से होते रहे तो वो दिन दूर नही, जब ये भ्रष्ट लोग हमे भी निगल जाएगें,
   
                     हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री मनमोबन सिंह ने अपने जवाबों में वही कहा की मरने वालों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हज़ार दिया जाएगा, सरकार इन लोगों को पैसा तो देती  है और फिर महंगाई बड़ाकर वापस उनकी जेब से वसुल भी कर लेती हैं आखिर कब तक चलेगा ये सब सरकार क्यों नही समझती लोगों को पैसो की नही बल्कि उनके साथ और आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा के इन्तज़ाम की ज़रुरत है अगर ये बात सरकार की समझ मे आ जाए तो फिर इस तरह के हादसों की संख्या भी कम हो जाएगी,

 और न ही लोगों को कोई मुआवज़ा देना पड़ेगा और न ही कोई महंगाई बड़ेगी....... और बेकसूर लोगों की ज़ान भी बच सकेगी|

Friday, 11 November 2011

my blog....!!!!!

pehli baar blog banaya hai....bohot khushi ho rahi hai.....!!!!....wese blog banane ka koi khass shaouk toh nahi hai...par....its a part of a assignment toh banana pada....!!! har hafte aik post likhni hai...wo bhi 500 words ki....kese hoga kuch samajh nahi aa raha h....!!!itne saare assignments allready hain...or uske upar se ye assignment..!!!uffffffff...par koi baat nahi.." karat karat abhyass ke jadmati hot sujaat....rasri awat jawat hai, sil par parat nisaan"!!!