बात बड़ी ही अज़ीब है लेकिन सच है , और इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब मैं दोपहर के समय
दिल्ली की सड़को पर घूमने निकला सिर्फ ये जानने के लिए कि बाहर इतनी गर्मी मे वे
लोग कैसे रहते है जिनके सर पर न छत है और न ही खाने को कुछ बड़िया साधन, पहनने को
वही पूराने घिसे पिटे गले कपड़े और बदन पर लगती गर्म हवा, बातों
बातों मे जब मैने एक अधेड़ उर्म के व्यक्ति से पूछा| “जब आप मेरी उर्म के रहे
होंगे क्या तब भी दिल्ली मे इतनी गर्मी पड़ती थी जितनी के अब” तो उसके बेजान शरीर
से बड़ी थकी हुई आवाज़ निकली ओर कहा कि गर्मी पहले भी पड़ती थी लेकिन उस समय सड़को
पर इतना “धुआं धाड़” नही होता था और बदन पर ठंडी
हवा पहुंचाने का काम सड़क के किनारे लगे हरे भरे पेड़ पौधे करते थे लेकिन अब न तो
पेड़ पौधे बचे हैं ओर धुआं धाड़ इतना कि सांस लेना भी दुष्वार हो जाता है इस गर्मी
में|
इनकी बातों
को सुनकर मुझे यही ज्ञात हुआ की सरकार के द्दारा चलाए जा रहे Clean Delhi Green Delhi के अभियान इनके लिए
तो एक सपने जैसा है लेकिन कुछ ही पल मे मैने सोचा ओर उस अधेड़ उर्म के व्यक्ति से
कहा कि ये जो सरकार का अभियान है उसे हम अपना अभियान मानकर पेड़ पौधे लगाए तो शायद
इस अभियान की चाल, रफतार मे तबदील हो जाए| बहुत सोच विचार के उसने कहा “हाँ” मैं अपने आस पास की
जगहों पर पेड़ पौधे भी लगाऊंगा ओर उनकी देख भाल भी करुगां| लेकिन दोस्तो ये
बात सिर्फ गर्मी को दूर भगाने की नही, बल्कि अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ
बनाने की है ओर लोगों को जागरुक करने कि भी है
मैं यहां अपने इस ब्लॉग के माध्यम से आपके सामने अपने विचारों को व्यक्त कर
रहा हूँ और आपसे गुज़ारिश कर रहा हूँ कि अपने किमती समय मे से थोड़ा समय निकालकर
इस ओर भी ध्यान दें अपने लिए नही बल्कि अपने वातावरण के लिए ओर उन तमाम लोगों के
लिए जो इन पर निर्भर है एक भी पौधा लगाने के बाद जो आपको खुशी मिलेगी वो मैं अच्छे
से समझूंगा, क्यों कि वह खुशी मैने खुद मेहसूस कि है और अगर मेरे बताने से पहले ही
ये कार्य कर चूके हैं तो आप भी अपने तज़रबे ओर विचारों को यहां comment कर सकते है|
धन्यवाद:
No comments:
Post a Comment