Sunday, 21 July 2013

3G और अटूट बंधन


                   आज के युग मे लड़का और लड़की दोनो कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहे है लेकिन इस साथ के पीछे का जो स्वार्थ है शायद वो सब नही समझ पा रहे है और जो समझ रहे है, वे जानते है कि इन दोनो के स्वार्थ कि वज़ह से बेचारा इतना खूबसूरत सा शब्द (हाँ क्यों कि अब ये शब्द ही रह गया है) रिशता वो बिखरता सा नज़र आ रहा है
                                     अब ऐसे मे पति पत्नी का रिशता जिसे हम अटूट बंधन के नाम से भी पुकारते है वो भी इस युग मे ज्यादा लंबे समय तक टिक्क जाए तो हम दोनो को ही किस्मत वाला कहते है, लेकिन कभी मामला दहेज प्रथा का होता है, तो कभी लड़की ही पैसों के लालच मे अपने प्रेमी या xyz  के साथ मिलकर अपने पति को फंसाने कि चाल चलती है और अब तो सरकार को भी पता है आज कि पीढ़ी कितनी स्वार्थी हो गई कि उसे किसी भी रिशते कि कोई परवाह नही, और आपको पता है सरकार झूठ नही बोल सकती, क्यों कि उसे तो तज़रबा है इसका Ha........Ha.......Ha........Ha.........
                                                           सरकार ने सोचा है अगर तलाकशुदा महिलाओं को पति कि पैत्रिक संपत्ति का आधा हिस्सा दे दिया जाए तो उन्हे विशेष लाभ होगा (एक खबर)............
मतलब पहले तलाक का मामला 5 या 6 साल तक खिंचता था वो भी तब जब पति तलाक चाहता था और महिला साथ रहना चाहती थी लेकिन अब तलाक 6 या 7 महिने मे हो जाएगा, आखिर महिला को विशेष लाभ जो मिलेगा, और इस तरह सरकार ने अटूट बंधन को तोड़ने के लिए क्या लाभकारी स्किम सोची है, जय हो कोर्ट वाले बाबा कि...................................

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